औरंगजेब (Aurangzeb) : History(इतिहास), Biography(जीवनी), Family(परिवार)


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औरंगजेब (Aurangzeb) ने अपने सभी भाइयों को सफलता के साथ पराजित किया था और सन 1658 पमें सिंहासन पर अधिकार कर लिया। औरंगजेब (Aurangzeb) आलमगीर के नाम से सिंहासन पर बैठा। उसने लगभग 50 वर्ष (Year) तक शासन किया ।उसका शासनकाल कठिनाइयों से परिपूर्ण था।

सम्राट बनने के उपरांत औरंगजेब ने जनता के आर्थिक कष्टों के निवारण हेतु राहदारी (आंतरिक पारगमन शुल्क) और पानदारी( व्यापारिक चुंगीयो) को समाप्त कर दिया।

उसने उलेमा वर्ग की सलाह के अनुसार इस्लामी परंपरा के अनुसार शासन किया ।उसने नोरोज उत्सव और झरोखा दर्शन (अकबर द्वारा प्रारम्भ)को समाप्त कर दिया ।उसने राज्य की गैर -मुस्लिम जनता पर पुनःजजिया कर लगा दिया।

शाहजहां के बीमार होने पर उसके पुत्रों में उत्तराधिकार प्राप्त करने के लिए युद्ध शुरु हो गए थे। 1636-37 ई में शाहजहां ने सिजदा प्रथा को समाप्त कर उसके स्थान पर चहार -तस्लीम की प्रथा प्रारम्भ की थी।

1634 ई में शाहजहां ने यह आदेश दिया कि यदि कोई हिंदू इस्लाम धर्म स्वीकार करता है तो उसे अपनी पैतृक सम्पति में    हिस्सा मिल जाएगा। इसके अतिरिक्त उसने मुस्लिम लड़की के हिंदू पुरूष से विवाह पर प्रतिबंध लगा दिया। हिन्दुओ पर तीर्थ यात्रा कर पुनः लगा दिया गया, किन्तु काशी के कविन्द्राचार्य की प्रार्थना पर काशी में उसे हटा दिया गया।

खंभात के नागरिकों की प्रार्थना पर उसने गोवध को निषेध कर दिया। उसने अहमदाबाद के चिंतामणि मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था।

औरंगजेब ने हिंदू त्योहारो को सार्वजनिक रूप से मनाए जाने पर प्रतिबंध लगा दिया ।उसने राज में सार्वजनिक नृत्य व संगीत पर भी प्रतिबंध लगा दिया यद्यपि व्यक्तिगत जीवन में वह स्वयं एक कुशल वीणा वादक था ।
○ अपने व्यक्तिगत  चारित्रिक गुणों के कारण औरंगजेब को जिंदा पीर के नाम से जाना जाता था ।औरंगजेब के शासनकाल में मुगल सामराज्य का सबसे अधिक विस्तार हुआ ।वह लगभग संपूर्ण भारत पर शासन करता था ।
पूना और कोंकण के आस पास का क्षेत्र पहाड़ी है ।इसी क्षेत्र में मराठे शक्तिशाली थे। छापामार गुरिल्ला- युद्ध प्रणाली अपनाकर वे मुगल सेनाओ को भी परेशान करने में सफल होते रहे।

बीजापुर के शासक ने अपने सेनापति अफजल खां को शिवाजी के विरुद्ध युद्ध करने को भेजा। किंतु शिवाजी ने उसकी हत्या कर दी।

औरंगजेब ने अपने अधिकारी जयसिंह को शिवाजी के विरुद्ध युद्ध करने के लिए भेजा । जयसिंह ने सूझ-बूझ से शिवाजी को राजी कर लिया कि वह उसके साथ औरंगजेब के दरबार में चलें।

शिवाजी के स्वतंत्र व्यवहार से औरंगजेब असंतुष्ट हो गया तथा उसने शिवाजी को कैद कर लिया । शिवाजी चालाकी से कैद से बाहर निकल आए।

 उन्होंने स्वयं को मराठा राज्य का स्वतंत्र शासक घोषित कर दिया तथा सन 1674 ईस्वी में वह राजसिंहासन पर बैठे।

सन 1680 ई मे अपनी मृत्यु के पूर्व के छह  वर्षों में वह शक्तिशाली मराठा राज्य स्थापित करने में सफल हुए ।

शिवाजी के उत्तराधिकारी अयोग्य  शासक थे । इनमें से केवल रानी ताराबाई जो अपने छोटे पुत्र की संरक्षक थी, योग्य थी।

औरंगजेब की मृत्यु के बाद मराठों ने अपने राज्य का तेज से विस्तार किया तथा उनका राज्य भारत का सबसे शक्तिशाली राज्य बन गया।


मुगल सामाज्य में होने वाले अन्य विद्रोह :-

औरंगजेब के शासनकाल में मुगल सामाज्य में अनेक विद्रोह हुए । मथुरा जिले में जाटों ने विद्रोह किया ।

बीजापुर और गोलकुंडा के घेरे वर्षों तक चलते रहे ।अंत में ये दोनों राज्य सन 1686 और 1687 ई में मुगल साम्राज्य में मिला लिए गए। औरंगजेब का राजपूतों के साथ भी संघर्ष आरंभ हो गया । राजस्थान के दो प्रमुख राज्यों मेवाड़ और मारवाड़ के शासक औरंगजेब के विरोधी हो गए।